जाट आरक्षण के बाद दलितों को जोडऩे के लिए कांग्रेस खेल सकती है नया कार्ड
राज्यसभा में पहुंचकर खुद को सेफ किया शैलजा ने
करनाल, 29 जनवरी (अनिल लाम्बा) : प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के साथ राजनीति के मैदान में छत्तीस के आंकड़े के बावजूद सोनिया की गुड बुक में शुमार पूर्व केंद्रीय मंत्री कुमारी शैलजा ने हुड्डा के हाथों से राज्यसभा की सीट छीनकर न केवल खुद को आगामी 6 सालों के लिए सेफ कर दिया है, बल्कि राज्यसभा सांसद के पद के करीब-करीब नजदीक पहुंची कुमारी शैलजा के लिए लोकसभा चुनावों से पहले कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष के पद पर पहुंचने का मार्ग भी लगभग प्रशस्त हो गया है। सुविज्ञ सूत्रों ने जानकारी दी है कि कुमारी शैलजा का राज्यसभा का सांसद बनना मौजूदा सी.एम. भूपेंद्र सिंह हुड्डा के लिए लगभग खतरे की घंटी है। इस समय हरियाणा में कांग्रेस के हालात खराब है। समझा जा रहा है कि कांग्रेस संगठन में जारी बिखराव तथा भीतरघात से परेशान कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी और राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सोनिया गांधी हरियाणा में राजनीति का नया कार्ड भी खेल सकते हैं। हाल ही में प्रदेश के जाट समुदाय को आरक्षण में कांग्रेस की जबरदस्त वकालत और कार्रवाई से प्रदेश का जाट समुदाय फिलहाल संतुष्ट नजर आ रहा है। केंद्रीय नेतृत्व यह मानकर चल रहा है कि आगामी लोकसभा चुनावों में जाट समुदाय कांग्रेस के साथ रहेगा। ऐसे में केंद्रीय नेतृत्व में हुड्डा के घोर विरोध के बावजूद जिस तरह से कुमारी शैलजा को हरियाणा से राज्यसभा का उम्मीदवार बनाया है। उससे शैलजा का राज्यसभा सांसद बनना तो तय ही है साथ ही साथ यह भी माना जा रहा है कि केंद्रीय नेतृत्व लोकसभा चुनावों से पहले अथवा बाद में कुमारी शैलजा को हरियाणा कांग्रेस की बागडोर थमा सकता है। इस समय कुमारी शैलजा गांधी परिवार के नजदीक है। तभी गांधी परिवार ने कुमारी शैलजा को आगामी 6 सालों के लिए राज्यसभा का सदस्य बनाकर उन्हें वफादारी का ईनाम भी दिया। राज्यसभा में खुद की एंट्री करवाकर कुमारी शैलजा ने आगामी चुनावों से दूर रहते हुए खुद को सांसद के रूप में भी सेफ करके दूसरी बाजी भी मार ली है और खुद को आगे बढ़ाने का इंतजाम भी कर लिया है। सुविज्ञ जानकारी के मुताबिक कुमारी शैलजा की अब नजर प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष पद पर है। यदि केंद्रीय नेतृत्व का प्लान और शैलजा की समझदारी बरकरार रही तो शैलजा प्रदेश कांग्रेस का अध्यक्ष बनकर न केवल हुड्डा पर लोकसभा की हार का ठीकरा फोड़ेंगी, बल्कि अगले विधानसभा चुनावों से पहले सी.एम. की प्रबल दावेदार भी बन जाऐंगी। राज्यसभा सांसद का रास्ता साफ होने के बाद यह तो तय हो गया है कि कुमारी शैलजा अब भी सोनिया गांधी की गुडबुक में पहले की तरह बनी हुई है और केंद्रीय नेतृत्व हरियाणा की राजनीति में शैलजा को हल्के से लेने को तैयार नही है। केंद्रीय नेतृत्व यह मानकर चल रहा है कि जाट आरक्षण के चलते एक तो जाट समुदाय का वोट बैंक सीधे उसके खाते में आएगा और दूसरा यदि उन्होंने कुमारी शैलजा को प्रदेश कांग्रेस का अध्यक्ष बना दिया तो कांग्रेस से लगातार खिसकता दलित वर्ग भी कांग्रेस के साथ आ खड़ा होगा। इससे कांग्रेस को दोहरा लाभ मिल सकता है, लेकिन अभी यह देखना बाकी होगा कि क्या कुमारी शैलजा की प्रदेशाध्यक्ष पर नियुक्ति लोकसभा चुनावों से पहले होती है या बाद में। कांग्रेस को दूसरा खतरा अब आप से भी होने लगा है। दिल्ली में सी.एम. का ताज खिसकने के बाद तथा एक टी.वी. चैनल के ताजे सर्वेक्षण में आम आदमी पार्टी को हरियाणा में 25 प्रतिशत से अधिक वोट मिलने से कांग्रेस सकते में है। हरियाणा में वह हर हाल में आम आदमी पार्टी के जनाधार को रोकने के लिए कुछ भी नए समीकरण पैदा कर सकती है। हरियाणा में आम आदमी पार्टी जहां कांग्रेस का बैंड बजाने का कारण बन सकती है। वहीं कांग्रेस के लगातार खिसकते जनाधार को कैच कर भाजपा-हजकां का गठबंधन तथा इंडियन नैशनल लोकदल मौज उड़ा सकते हैं, लेकिन यह आम आदमी पार्टी को मिलने वाली सीटों पर निर्भर रहेगा। बहरहाल इस बात से इन्कार नही किया जा सकता कि लोकसभा चुनावों से पहले हरियाणा में नए राजनीति समीकरण पैदा हो रहे हैं। 2005 में हरियाणा में भजनलाल के नेतृत्व में लड़े गए चुनावों में मिली भारी जीत को जिस तरह केंद्रीय नेतृत्व ने प्रदेश नेतृत्व को अचानक मोड़ दिया था। उसे केंद्रीय नेतृत्व कब दोहरा दें इस बात से इन्कार नही किया जा सकता।

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